स्वास्थ्य

तराई क्षेत्र में बढ़ रहे पथरी के रोग के बारे में मंडल के वरिष्ठ सर्जन से न्यूज प्लस इंडिया की हुई खास बातचीत..पढ़ें पूरी खबर

 

Report : Rajesh Pandey

श्रावस्ती। इकौना के मिश्रा सेवा अस्पताल में आयोजित कैम्प में भाग लेने आये मंडल के वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर तारिक अफजल सिद्दकी से न्यूज प्लस इंडिया ने तराई क्षेत्रों में युवाओं के गुर्दों में तेजी से बढ़ रहे पथरी के रोग के बारे में एक खास बातचीत की ।
जिस पर डॉक्टर सिद्धिकी ने बताया कि प्रदूषित पानी पीने और बीजदार सब्जी के खाने से पथरी होता है। ये पथरी किडनी और पित्ताशय में पाई जाती हैं।
कैल्शियम अन्य पदार्थों जैसे आक्सलेट फास्फेट या कार्बोनेट से मिलकर पथरी का निर्माण होता हैं। पुरुषों में यूरिक एसिड पथरी भी पाई जाती है। किस्टाइन पथरी महिला और पुरुष दोनों में वंशानुगत हो सकती है। मूत्रमार्ग में संक्रमण की वजह से स्ट्रवाइट पथरी होती है जो आमतौर पर महिलाओं में पायी जाती है।
जानवरों में पाये जाने वाले प्रोटीन की मात्रा सीमित कर देनी चाहिए, इससे कैल्शियम स्‍टोन और यूरिक एसिड स्‍टोन के होने का खतरा बढ़ जाता है। मछली, मांस, में प्रोटीन के साथ कैल्सियम की मात्रा अधिक होती है, इसलिए पथरी में इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
विटामिन सी जब ऑक्‍सलेट और कैल्शियम के संपर्क में आता है तब इसे कैल्शियम ऑक्‍सलेट स्‍टोन बनता है। 2000 मिग्रा से अधिक विटामिन सी का सेवन करने से स्‍टोन होने का खतरा बढ़ जाता है।किड्नी स्‍टोन होने पर टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, चाय, आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। तिल, काजू अथवा खीरे, आंवला, में भी आक्सेलेट अधिक मात्रा में होता है इनका भी सेवन न करें। बैगन, फूलगोभी में यूरिक एसिड व प्यूरीन अधिक मात्रा में होता है, इनका भी सेवन न करें। पथरी होने पर पानी का अधिक सेवन करने की सलाह दी, और कहा कि कुछ पेय पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो पथरी होने पर नहीं पीना चाहिए। स्‍टोन होने पर सोडा का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए, इसमें फॉस्‍फोरिक एसिड होता है जो स्‍टोन के खतरे को बढ़ाता है।
रिपोर्ट:-राजेश कुमार पाण्डेय

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