स्वास्थ्य

तीन साल का अंतर, खुशहाल परिवार का मंतर

जनपद के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मनाया गया खुशहाल परिवार दिवस,
– नव विवाहित , 3 से ज्यादा बच्चे वाली महिलाएं तथा एनीमिक धात्री महिलाएं हुयी शामिल
– 44 महिला और दो पुरुष नसबंदी के साथ मनाया गया खुशहाल परिवार दिवस
– 72 अंतरा इंजेक्शन के साथ 80 महिलाओं ने अपनायी कापर टी
– 157 महिलाओं को भायी छाया गोली

रिपोर्ट, दिनेश शर्मा न्यूज़ प्लस इन्डिया 

बहराइच 21 नवम्बर 2020 : खुशहाल परिवार के लिए जरूरी है कि दो बच्चों के बीच कम से कम तीन साल का अंतर हो। यह उन महिलाओं के लिए और भी जरूरी है जिनका प्रसव अभी हाल ही में हुआ है और वह एनीमिक हैं। साथ ही ऐसी नव विवाहिता महिलाएं जिनकी उम्र 20 साल से कम है । इसके अलावा ऐसी महिलाएं जिनके 3 से अधिक बच्चे हैं। ऐसी सभी महिलाओं को गर्भ निरोधक साधनों की जानकारी और उपलब्धता के लिए शनिवार को जनपद की सभी स्वास्थ्य इकाईयों पर खुशहाल परिवार दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जिला महिला अस्पताल में फीता काट कर खुशहाल परिवार दिवस का शुभारंभ किया गया ।
इस मौके पर नोडल परिवार नियोजन एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ योगिता जैन ने कहा कि हमारे संसाधन सीमित हैं, ऐसे में आबादी को भी सीमित रखना बहुत ही जरूरी है । दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखना चाहिए ताकि महिला का शरीर पूरी तरह से दूसरे गर्भधारण के लिए तैयार हो सके। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी व्यापक सुधार लायी जा सकती है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश मोहन श्रीवास्तव ने नव दंपत्ति को शादी के दो साल बाद ही बच्चे के बारे में सोचने के प्रति जागरूक करने की बात कही, क्योंकि पहले जरूरी है कि पति-पत्नी एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझें, परिवार को समझें और अपने को आर्थिक रूप से इस काबिल बना लें कि अच्छी तरह से बच्चे का लालन-पालन कर सकें, तभी बच्चा पैदा करने की योजना बनाएं । साथ ही कहा कि पुरुषों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए स्वयं पहल करनी चाहिए । अधिक बच्चों को पैदा करना मर्दानगी की निशानी नहीं है इससे परिवार और समाज पर आर्थिक तंगी का अधिक प्रभाव पड़ता है ।
वहीं सीएचसी चित्तौरा अधीक्षक डॉ रीतेश ने योग्य दम्पतियों को जागरुक करते हुए उन्होंने कहा कि अगर बच्चों की संख्या और उनके पैदा होने के समय पर नियंत्रण है, तो महिला अधिक स्वस्थ रहेगी । फिर भी, यह निर्णय लेना कि वह परिवार नियोजन का प्रयोग करना चाहती है कि नहीं, उसका अधिकार होना चाहिए क्योंकि उसके शरीर को ही गर्भ का बोझ व बच्चों को पालने –पोसने की जिम्मेदारी सहन करनी पड़ती है । इस अवसर पर आई हुईं सभी महिलाओं की एनीमिया की जांच, नव विवाहित महिलाओं को पहल किट के साथ ही योग्य दंपत्ति को उनके रुचि के अनुसार परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध कराये गए ।

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