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कछुए की चाल सें भी बत्तर हैं मनकापुर सी. ओ. राम भवन यादव की विवेचना – अधिवक्ता पंकज दीक्षित

ब्युरो न्यूज़ प्लस इण्डिया गोण्डा

यूपी गोण्डा । वैसे भी गोण्डा पुलिस का करनामाँ किसी सें भी छिपा नही हैं वहीं मोतीगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता व उसके परिजन ने पुलिस उपाधीक्षक मनकापुर राम भवन यादव पर गंभीर आरोप लगाकर उनको कटघरे में खड़ा कर दिया हैं लेकिन उच्च पद पर आशीन होने के नाते श्री यादव पर कोई कार्यवाही नही की होगी, पीड़िता का मुकदमा अपराध संख्या 07/2019 स्थानीय थाना मोतीगंज जनपद गोंडा में दर्ज होकर पुलिस उपाधीक्षक मनकापुर को स्थान्तरित हुई थीं जिसमें आरोपी अभियुक्त ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव होने के नाते उन्होने अपने प्रभाव एवं दबाव में विवेचक को खरीद कर मामले को दफन कराते हुए फाइनल रिपोर्ट भेजवा दिया था, मामला काफी गंभीर प्रकृति का हैं और जिलाधिकारी गोंडा की जांच में आरोपों की पुष्टि हो चुकी हैं और विभागीय कार्यवाही में अभियुक्त निलंबित भी हो चुके हैं लेकिन उपाधीक्षक मनकापुर की कृपा सें अभियुक्त को निर्दोष करार देते हुए बार बार फाइनल रिपोर्ट भेज दिया जा रहा, पीड़िता के आपत्ति एवं पर्यवेक्षण अधिकारी के जांच उपरांत पुनः विवेचना हेतु पत्रावली वापस उसी विवेचक को भेज कर औपचारिकता की जा रही हैं जिसमें पीड़िता का आरोप हैं कि आज तक कोई विवेचना के लिए कोई आया ही नही और मैं कई बार साक्ष्य लेकर गयी और जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध करायी लेकिन उपाधीक्षक के सहयोगी जो विवेचना को शुरू सें देख रहे हैं बिना साक्ष्य को सम्मिलित करते हुए यह कहकर फाइनल रिपोर्ट भेज दे रहे हैं कि एक बार दंड मिल चुका हैं अभियुक्त निलंबित हुए थे इसलिए बार बार दंड नही मिल सकता जबकि यह कथन उनका कानून के बिल्कुल ही विपरीत हैं जो व्यक्ति जिलाधिकारी की जांच में आरोपी सिद्ध हो चुका हैं वह पुलिस उपाधीक्षक मनकापुर की कलम सें निर्दोष कैसे साबित हो सकता हैं,यह एक यक्ष प्रश्न हैं ? पीड़िता निष्पक्ष विवेचना के लिए कप्तान और पुलिस उपमहानिरीक्षक के दर तक माथा पटक कर न्याय की गुहार लगा चुकी हैं लेकिन राजनैतिक रसूख और दबाव तथा प्रभाव में विवेचना स्थान्तरित नही की गयी, पुनः विवेचना हेतु पत्रावली पुलिस उपाधीक्षक मनकापुर कार्यालय में उनके आने सें पहले सें ही धूल फांक रही हैं जिसकी विवेचना राम भवन यादव द्वारा की जा रही हैं जिन्होने जनवरी 2019 की प्रथम सूचना रिपोर्ट में आज तक विवेचना पूरी नही कर सके, ऐसे लचर व्यवस्था के आगे पीड़िता इंसाफ के लिए दो वर्षो सें भटक रही हैं लेकिन मामले को गंभीरता सें न तो विवेचक ने लिया न ही जिला प्रशासन ने, मामला पुलिस महानिदेशक और शासन के संज्ञान में लाया गया हैं अब देखना हैं कि पीड़िता को इंसाफ मिलता हैं कि नही,वैसे तो पीड़िता ने अब न्याय की उम्मीद छोड़ दी हैं और इस लचर व्यवस्था के आगे न्याय की उम्मीद नही लगायी जा सकती,सूत्र बताते हैं अभियुक्त वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं और मामला गबन सें समन्धित हैं इसलिए विवेचना को प्रधानी कार्यकाल तक शिथिल करा दिया गया हैं ताकि इसका असर उनके कार्यकाल पर असर न डाल सके।

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