Good Work राज्य

पत्रकारों की हत्या व उत्पीड़न के विरूद्ध उपजा का विरोध जारी ।

गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी के हत्यारों को अविलंब फांसी व पीड़ित परिवार को 50 लाख की छति पूर्ति दिये जाने की उठाई मांग

ब्युरो रिपोर्ट न्यूज़ प्लस इण्डिया

यूपी गोण्डा । नेशनल यूनियन जर्नलिस्टस आफ इडिंया से संबद्व यूपी जर्नलिस्टस एसोसिएसन उपजा के पत्रकारों ने देश के गृह मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित मांग पत्र में कहा कि गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी के हत्यारों को अविलंब फांसी की सजा दिलायी जाये साथ ही पीड़ित परिवार को 50 लाख रूपये की छति पूर्ति सरकार अविलंब करें।
शनिवार को देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर उपजा ने अपना विरोध जताते हुये कहा है कि सरकार सहानुभूति पूर्वक विचार कर अविलंब मांगो को पूरा करें वर्ना पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे। प्रदेश की लचर कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुये उपजा के प्रदेश अध्यक्ष डा0 जी0 सी0 श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ रही अपराधिक घटनाएं चिन्ता का सबब बन रही है। जिसके कारण पत्रकारों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। ऐसे में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाये। उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के विरूद्ध कार्रवाई का सिलसिला बढ़ता जा रहा है बीते एक माह में लगभग आधा दर्जन से उपर जिलो में पत्रकारों पर फर्जी कार्रवाई की गयी है। उन मामलो को वापस लेते हुये केन्द्र सरकार मीडिया आयोग के गठन का रास्ता प्रशस्त करें। जिला अध्यक्ष रईस अहमद व महामंत्री जगपाल सिंह की अगुआई में आगे की रणनीति पर तय करते हुये कहा गया हैं समूचे प्रकरण की जांच सीबीआई से करायी जाये। जिला अध्यक्ष रईस अहमद ने भेजे गये पत्र में कहा है कि पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह संदिग्ध है। संलिप्त पुलिस एंव माफियाओं को संरक्षण देने वाले थानेदार पर भी हत्या का मामला दर्ज किया जाये। साथ ही कहा गया कि यदि इन मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं किया गया तो उपजा सड़क पर उतरकर धरना प्रर्दशन करते हुये जनान्दोलन करेगी।  वहीं महामंत्री जगपाल सिंह ने जनपद के एक महिला पत्रकार पर फर्जी मुकदमे लिखाये जाने की निंदा करते हुये अविलंब मामले को वापस लेने की भी मांग की गयी है। जिले के प्रमुख पत्रकार मनोज श्रीवास्तव, आशीष श्रीवास्तव, मकसूद अकरम, मनोज गुप्ता सहित दर्जनों पत्रकारों के हस्ताक्षर युक्त पत्र पर अविलंब निर्णय लेने की मांग की गयी है।

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