स्वास्थ्य

कोरोना से बचाव के साथ शिक्षित भी कर रही ‘दीक्षा’ – सरकारी स्कूलों के बच्चों की शिक्षा का अस्त्र बना ऐप

श्रावस्ती, 15 जून। अब से कोई आठ माह पूर्व बेसिक शिक्षा विभाग ने जब मोबाइल एेप ‘दीक्षा’ को लागू किया तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह ऐप कोरोना संकट काल में वरदान बन जाएगा। आज जब हर कोई वर्क फ्राम होम के सिद्धांत पर काम कर रहा है, ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग भी पीछे नहीं है। प्रदेश सरकार ने 31 जुलाई तक बच्चों के स्कूल आने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसे में यह ऐप इन छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए एक बड़ा अस्त्र बनकर उभरा है।
इस ऐप के जरिए विभाग ने बेसिक शिक्षा को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लांच कर दिया है। इस मोबाइल ऐप पर कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के सभी विषयों की किताबें मौजूद हैं। क्यूआर कोड को स्कैन कर बच्चे और शिक्षक दोनों ही पाठ्य पुस्तकों को न सिर्फ पढ़ सकते हैं। बल्कि ऑडियो विजुअल सामग्री के माध्यम से देख-सुनकर अपनी समस्या का समाधान भी कर सकते हैं।
स्मार्ट मोबाइल फोन पर पर आवाज के साथ ही साफ चित्र भी दिखेगा। मगर चित्र में कोई चेहरा नहीं होगा, बल्कि गणित लगाने का तरीका और अंग्रेजी व हिंदी के व्याकरण को स्पष्ट तरीके से समझाया गया है। इस ऐप के माध्यम से शिक्षकों को विभिन्न तरह का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। बीते जून माह में हुए उपचारात्मक शिक्षा प्रशिक्षण इसी ऐप के माध्यम से हुआ। जिसमें प्रदेश के लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं को कोविड-19 के प्रोटोकाल के तहत घर बैठे यह सीखने का मौका मिला कि कक्षा के किसी एक अथवा एक से अधिक कमजोर बच्चों को किस तरह से ट्रीट किया जाए कि वह कक्षा के दूसरे बच्चों की तरह हो जाए। इस प्रशिक्षण में शामिल होने वाली शिक्षिका सोमपाल कटियार व शिक्षक विवेक मिश्रा का कहना है कि इस ट्रेनिंग के माध्यम से हमें यह जानने का मौका मिला कि कक्षा के कमजोर बच्चों को किस तरह से पढ़ा और समझाकर हम उन्हें अन्य बच्चों के समान बना सकते हैं। इसके अलावा इस ऐप पर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण होते रहते हैं। शिक्षक ललित मिश्रा कहते हैं कि दीक्षा एप को डाउन लोड करने वाले अध्यापक और अध्यापिकाएं स्कूलों में इसका सहारा भी ले रहे हैं। इससे पढ़ाई जहां आसान हुई है, वहीं शिक्षक-शिक्षिकाओं का बोझ भी हल्का हुआ है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी ओमकार राणा कहते हैं कि कोरोना संकट के दौर में जब तमाम विभाग अपने कार्यों के लिए विकल्पों की तलाश कर रहे थे, ऐसे में हमारे पास दीक्षा जैसा एक सशक्त मोबाइल ऐप मौजूद था। इस ऐप के माध्यम से हम कोविड-19 का प्रोटोकाल करते हुए न सिर्फ शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित किया बल्कि छात्र-छात्राओं को भी शिक्षित करने का काम किया है। अच्छी बात यह है कि यह एक मोबाइल ऐप है, आज लगभग हर परिवार में एक स्मार्ट फोन जरूर है, ऐसे में यह ऐप बेसिक शिक्षा के छात्र-छात्राओं के लिए बेहद कारगर है। वह कहते हैं कि विभाग को हाईटेक बनाने की कवायद काफी अर्से से हो रही हैं। अब तो कोरोना महामारी के चलते ऑनलाइन प्रशिक्षण और भी जरूरी हो गया है। दीक्षा एप के माध्यम से छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षक व शिक्षिकाओं की क्षमताओं का भी विकास तेजी से हो रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एपी भार्गव का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक-शिक्षिकाएं मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर छात्र-छात्राएं को पढ़ाने का काम कर रहे हैं, यह एक सार्थक पहल है। इससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को सहूलियत है, साथ ही कोरोना संक्रमण की संभावनाएं भी खत्म हो गई।

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