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साहब खींच कर फोटो करना दान गरीबों का छिनता हैं सम्मान

ऐसे मामले का खास असर उन मिडल क्लास परिवार पर पड़ रहा है जो सिर्फ फोटो या नाम जगजाहिर होने के डर से यह सहयोग नहीं ले पा रहे हैं।

आँखों देखी रिपोर्ट, दिनेश शर्मा न्यूज़ प्लस इन्डिया बहराइच मो,9648944666,

बहराइच- 21 दिनों का लाक डाउन समाप्त होने के बाद एक बार पुनः माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आदेशानुसार 3 मई 2020 तक लॉक डाउन बढ़ाया गया है। विगत कई दिनों से जिले के कई संगठन व समाज सेवी गरीबों को निःशुल्क भोजन राशन इत्यादि का वितरण कर रहे हैं। लेकिन कुछ समाजसेवी ऐसे भी हैं जिनका उद्देश्य लोकप्रियता हासिल करना ही है। गरीब की सहायता करने के साथ उसकी फोटो शोशल मीडिया पर डालकर ये तथाकथित समाजसेवी सबसे ज्यादा उसी गरीब को समाज में प्रदर्शित करते हुए आहत कर रहे हैं। ऐसे मामले का खास असर उन मिडल क्लास परिवार पर पड़ रहा है जो सिर्फ फोटो या नाम जगजाहिर होने के डर से यह सहयोग नहीं ले पा रहे हैं।
दूसरी तरफ कुछ समाजसेवी ऐसे भी नज़र में आये जो चुपचाप गरीबों व अन्य जरूरतमंद लोगों की सहायता बिना किसी जाति धर्म के आधार पर कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं डॉ विकास दीप वर्मा जोकि पेशे से चिकित्सक हैं वो और उनके कुछ साथी लगातार गरीबों में राशन सब्जी दवा इत्यादि पहुंचा रहे हैं। उन्होंने एक अपील के साथ अपना मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर डाल रखा है कि जिस किसी भी जरूरतमंद को दवा, राशन, सब्जी की आवश्यकता हो वह दिए गए फोन नम्बर पर उनसे सम्पर्क कर निःशुल्क प्राप्त कर सकता है, वो और उनकी टीम फोटो या नाम सार्वजनिक नहीं करेंगे। इनके द्वारा अब तक लगभग 60,65 लोगों की मदद इस प्रकार से की जा चुकी है।आइये आपको मैं कल शाम की आखों देखी घटना बताता हूँ। पुलिस लाइन क्षेत्र की एक लड़की का फोन डॉ वर्मा के पास आता है वह लड़की ग्रेजुएशन कर रही है उसके पिता ई रिक्शा चालक हैं भाई की इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग की दुकान है। गर्मी की शुरुआत होने के कारण भाई ने घर का सारा पैसा अगामी आमदनी को सोचकर पंखे कूलर रिपेयरिंग के सामान खरीदने में लगा दिया। लॉकडाउन होने के कारण दुकान भी नहीं खुल सकती, पिता ई रिक्शा भी नहीं चला सकते। उनके मोहल्ले में अगर कोई राशन बांटने भी जाता है तो फोटो खींचता है इस वजह से संकोचवश उनका परिवार दो दिन तक भूखे पेट सोया। सोशल मीडिया पर डॉ वर्मा की पोस्ट को देखकर उसने फोन किया और यथासंभव मदद सार्वजनिक रूप से आहत हुए बिना प्राप्त की। डॉ विकास दीप वर्मा के अनुसार इस प्रकार के कई फोन उनके पास दिन भर आते हैं जो बिना फोटो के मदद चाहते हैं।
मैं डॉ वर्मा की मुहिम की सराहना करते हुए इतना कहना चाहूंगा कि आप सभी मदद करें पर किसी की मजबूरी का फायदा ना उठाएं फोटो खींचकर उसकी आत्मा को दुःखी न करें। गरीब खुद्दार होता है लेकिन बेशर्म नहीं। आप एक फोटो डालकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के चक्कर में गरीब की इज्जत सरेबाज़ार न उछालें। बल्कि डॉ वर्मा जैसे समाजसेवियों से सीख लेते हुए एक मिसाल कायम करें।

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