राज्य समस्या सम्पादकीय

अफवाह पर बेलगाम होता भीड़तंत्र, किसी को भी समझ लेते हैं “बच्चा चोर…

रजनी कान्त तिवारी प्रभारी उत्तर प्रदेश न्यूज़ प्लस इण्डिया

समाज व सोशल मीडिया के चंद गैर जिम्मेदाराना बयान वीरों के चलते देश में बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की अफवाह से आयेदिन बेगुनाह लोगों की जान सांसत में है। कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेकर शान समझने वाली उन्मादी भीड़तंत्र में शामिल भीड़ देश में जगह-जगह लोगों को आयेदिन बच्चा चोर बताकर पीट रही है जो कि बहुत ही सोचनीय व चिंताजनक स्थिति है। आज देश के कई राज्यों में बने इस तरह के चिंताजनक हालात से जगह-जगह कानून के पहरेदार पुलिस-प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। अफवाहों के चलते कुछ जगह तो हालात ऐसे होते जा रहे है कि कानून व्यवस्था के लिए आयेदिन मुश्किल खड़ी हो रही है। हालांकि पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने बच्चा चोरी की अफवाह फैलाने वाले व बेगुनाह को पीटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। लेकिन फिर भी देश के चंद लोगों के गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते अभी भी इस तरह की घटनाओं पर लगाम नहीं लग पायी है। जिस तरह से कुछ माह में ही उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्यप्रदेश आदि राज्यों में बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते हुई घटनाओं ने राज्य सरकार, पुलिस मुख्यालय से लेकर थाना पुलिस के सभी अधिकारियों तक की नींद उड़ा कर रख दी है। इस बेहद ज्वंलत मसले पर पुलिस के आला अधिकारी भी मानते हैं कि इस तरह की अफवाह वाले मामलों में बच्चा चोरी की घटना हकीकत में तो होती नहीं है, लेकिन अफवाहों के चलते फिर भी इस मसले को लेकर आयेदिन हिंसा होती है। जो कि स्वस्थ्य व कानून पंसद समाज के हित में ठीक नहीं हैं। इस मसले पर अगर हम ध्यान दे तो यह आमजनमानस से जुड़ा बेहद भावनात्मक मामला है और इसलिए ही अफवाह फैलाने वाले तंत्र ने देश में माहौल खराब करने के उद्देश्य से ही इस मामले पर आयेदिन बहुत ही तेजी के साथ अफवाह फैलाने का काम किया हैं। सबसे बड़ी सोचने वाली बात यह है कि हम सोशलमीडिया के बयान वीर भी बिना कुछ सोचे समझे इस प्रकार के झूठे संदेशों को सोशलमीडिया के माध्यमों वाट्सएप आदि पर आगे फॉरवर्ड व फैसबुक, ट्विटर आदि पर शेयर करके उन अपराधियों का सहयोग कर रहे हैं। एक तरफ देश में बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते आयेदिन भीड़ उन्मादी होकर लोगों की जान लेने पर उतारू हो रही है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस-प्रशासन ने अफवाह फैलाने वाले व कानून तोड़ने वालों को लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करनी शुरू कर दी हैं। साथ ही अब पुलिस-प्रशासन सोशलमीडिया पर अफवाह फैलाने वाले लोगों को चिन्हित करके उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही कर रहा है और इस ज्वंलत मसले आम लोगों को सोशलमीडिया पर अन्य तरीकों से जागरूक करने जैसे कारगर कदम उठा रहा है। कुछ प्रदेशों में तो बच्चा चोरी के अफवाह को लेकर इस कदर दहशत का माहौल बन गया है कि छोटे बच्चों के अभिभावक भी अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जिस ढंग से हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बच्चा चोरी करने का शक होते ही लोग उग्र होकर उन्मादी भीडतंत्र में बदल रहे हैं, यह हालात आम शांतिप्रिय जनमानस के साथ-साथ कानून व्यवस्था व उसके रक्षकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। इस मसले पर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बच्चों के प्रति अपराध, उनकी चोरी या उनकी खरीद-बिक्री या तस्करी में जिस तरह से वृद्धि हुई हैं, उसका फायदा अफवाह फैलाने वाला तंत्र ले रहा है। हालांकि समय-समय पर पुलिस-प्रशासन ने बच्चों के प्रति इस तरह के घिनौने अपराधों को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करके उनको जेल में पहुचाने का कार्य किया है। लेकिन फिर भी लोग झूठी अफवाहों पर बिना कुछ सोचे समझे कानून हाथ में लेने के लिए तैयार है। यह भी मानने वाली बात है कि इन दिनों भी बच्चों के प्रति अपराध की इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा हो यह संभव है, लेकिन क्या केवल बच्चा चोरी की अफवाह सुनकर कानून को हाथ में ले लेना और किसी को भी सजा दे देना कहीं से भी कानूनी रूप से उचित नहीं है।

अफवाह फैलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ना केवल पुलिस व उसके साईबर क्राइम सेल को बहुत अधिक मुस्तैदी दिखानी होगी…

कानूनी जानकारों का मानना है कि देश में इस तरह की अफवाह फैलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ना केवल पुलिस व उसके साईबर क्राइम सेल को बहुत अधिक मुस्तैदी दिखानी होगी, बल्कि आम जनमानस को भी जागरूक बनाना होगा। तब ही इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है अन्यथा ऐसी घटनाएं आए दिन सामने आती रहेंगी और निर्दोष लोगों की जानमाल पर खतरा बना रहेगा।अभी हाल की कुछ घटनाओं पर नजर डाले तो उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्यप्रदेश में बच्चा चोरी की अफवाह के चलते ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जो कि झकझोर देने वाली हैं।

बच्चा चोर गिरोह की अफवाहों को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन को कुछ प्रभावी कदम उठाने चाहिए…

1-: सोशलमीडिया व अन्य किसी भी माध्यम से अफवाह फैलाने वालों की निगरानी करके उनके खिलाफ सख्ती से कार्यवाही करें, उनके सोशलमीडिया खाते चिन्हित करके स्थाई रूप से बंद करवाये।

2-: अफवाह में आकर मारपीट करने वालों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में सख्त कार्यवाही करके लोगों को कानून हाथ में ना लेने का संदेश प्रदान करें।

3-: अफवाह फैलाने की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए पुलिस को सोशल मीडिया पर व समाज के जागरूक नागरिकों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहिए।

4-: बच्चों से संबंधित सोशल मीडिया पर चलने वाली सूचनाओं का पुलिस को तुरंत संज्ञान लेकर उसकी सत्यता को जांचना चाहिए।

5-: पुलिस इस विषय में एक एडवाइजरी जारी करके लोगों को बताया है कि अब तक मिली बच्चा चोरी की सभी सूचनाएं अफवाह निकली है। अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है।

6-: पुलिस को लोगों को जागरूक करना चाहिए कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखे तो पहले ठीक तरह से उसकी पड़ताल कर लें, स्वयं कानून हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना दें।

7-: पुलिस को लोगों को समझना चाहिए कि भीड़ को उकसाने में किसी शरारती तत्वों का हाथ हो सकता है जो कि समाज व शहर का माहौल खराब करना चाहता हो, इसलिए अगर कोई बच्चा चोरी के आरोप में किसी की पिटाई करे तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।

8-: बच्चों से संबंधित घटनाओं में पुलिस को तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए, जिससे लोगों को अपने बच्चे सुरक्षित महसूस हो।

9-: पुलिस को आमजनमानस का विश्वास जीतने के लिए लोगों से मेलजोल बढ़ाना चाहिए व अपनी छवि को सुधारने का ठोस प्रयास करने चाहिए। जिससे लोग स्वयं कानून हाथ में ना लेकर कानून का सम्मान भय से ना करके दिल से करना शुरू करें। आदि
उपरोक्त कुछ बेहद प्रभावी कदम उठाकर देश में बढ़ती बच्चा चोर गिरोह की अफवाहों पर लगाम लगाकर आम जनता को उसकी सुरक्षा के लिए आश्वस्त किया जा सकता हैं।
वरना देश में आज जिस तरह अभिवावकों को भी अपनी व अपने बच्चों की सुरक्षा का डर सताने लगा है, वह सोचनीय है और देशहित में ठीक नहीं हैं। जिस तरह से आयेदिन देशभर से बच्चा चोर गैंग की खबरें सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रही है और इन अफवाह के चलते कई जगह जहां बेकसूर लोगों के साथ-साथ अब अपने बच्चों के साथ धूम रहे अभिवावकों के साथ भी मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। इससे अभिभावकों में भी अपनी व अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। जिसके निदान के लिए सरकार को देश में बढ़ते भीड़तंत्र पर जाति-धर्म से ऊपर उठकर जल्द से जल्द लगाम लगानी चाहिए, जिससे देश में लोग नियम, कायदे व कानून का सम्मान करना शुरू करें और देश में अमनचैन सुखशांति का राज कायम हो ।

रजनी कान्त तिवारी यूपी प्रभारी
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Rajni Kant Tiwari
यूपी प्रभारी न्यूज़ प्लस इण्डिया सम्पर्क सूत्र 9839946832
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